हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 18.2.5

अध्याय 18 → खंड 2 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 18)

सामवेद: | खंड: 2
पिबा त्वा३स्य गिर्वणः सुतस्य पूर्वपा इव । परिष्कृतस्य रसिन इयमासुतिश्चारुर्मदाय पत्यते ॥ (५)
हे इंद्र! आप पूजनीय हैं. सोमरस मददायी, आनंदवर्द्धक व गुणमय है. आप सब से पहले इस साफ छने हुए सोमरस को पीने की कृपा करें. (५)
O Indra! You are revered. Someras is informative, joyful and virtuous. Please drink this clean filtered somers first of all. (5)