हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 18.3.2

अध्याय 18 → खंड 3 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 18)

सामवेद: | खंड: 3
गर्भे मातुः पितुष्पिता विदिद्युतानो अक्षरे । सीदन्नृतस्य योनिमा ॥ (२)
हे अग्नि! आप पृथ्वी माता के गर्भ में विशेष रूप से प्रकाशित हैं व अंतरिक्ष में पिता की भूमिका में विराजमान हैं. अग्नि यज्ञ में वेदी पर प्रतिष्ठित हैं. (२)
O agni! You are specially illuminated in the womb of Mother Earth and are seated in the role of father in space. The agni is revered on the altar in yajna. (2)