सामवेद (अध्याय 18)
त्वमिन्द्र यशा अस्यृजीषी शवसस्पतिः । त्वं वृत्राणि हँस्यप्रतीन्येक इत्पुर्वनुत्तश्चर्षणीधृतिः ॥ (७)
हे इंद्र! आप यशस्वी, धैर्यवान, दुश्मनों को मारने वाले व शक्ति के स्वामी हैं. आप जैसे देवता के बारे में हम ने पहले नहीं सुना. (७)
O Indra! You are successful, patient, kill enemies and master of power. We haven't heard of a god like you before. (7)