सामवेद (अध्याय 18)
यमग्ने पृत्सु मर्त्यमवा वाजेषु यं जुनाः । स यन्ता शश्वतीरिषः ॥ (१)
हे अग्नि! आप युद्ध में जिन लोगों को लगाते हैं, उन्हें अन्न व बल प्रदान करते हैं और मृत्यु से उन की रक्षा करते हैं. (१)
O agni! You give food and strength to those you engage in war and protect them from death. (1)