हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 18.5.3

अध्याय 18 → खंड 5 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 18)

सामवेद: | खंड: 5
स वाजं विश्वचर्षणिरर्वद्भिरस्तु तरुता । विप्रेभिरस्तु सनिता ॥ (३)
हे अग्नि! ब्राह्मणों द्वारा आप की प्रशंसा की जाती है. आप संसार के द्रष्टा हैं. आप घोड़ों के द्वारा हमें युद्ध जिताएं. आप कल्याणकारी हैं. (३)
O agni! You are praised by Brahmins. You are the seer of the world. You win us the war through horses. You are a benefactor. (3)