सामवेद (अध्याय 18)
त्वँ हि शूरः सनिता चोदयो मनुषो रथम् । सहावान्दस्युमव्रतमोषः पात्रं न शोचिषा ॥ (९)
हे इंद्र! आप शूरवीर व दानशील हैं और मनुष्यों को सन्मार्ग पर प्रेरित करते हैं. अग्नि की ज्वाला जैसे तपाती है, वैसे ही आप शत्रुओं को तपाते हैं. (९)
O Indra! You are a knight and a donor and inspire humans on the path of peace. Just as the flame of agni is, so you heat enemies. (9)