सामवेद (अध्याय 19)
वृष्टिद्यावा रीत्यापेषस्पती दानुमत्याः । बृहन्तं गर्त्तमाशाते ॥ (८)
हे मित्र! आप उत्तम स्थान पर विराजित हैं. हम वर्षा के लिए उन की उपासना करते हैं. वे पृथ्वी पर सब कुछ नियम से उपलब्ध कराते हैं, दानशील व अन्न के स्वामी हैं. (८)
Hey friend! You are sitting in the best place. We worship them for rain. They provide everything on earth by law, are charitable and the masters of food. (8)