हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 2.10.4

अध्याय 2 → खंड 10 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 2)

सामवेद: | खंड: 10
यद्वीडाविन्द्र यत्स्थिरे यत्पर्शाने पराभृतम् । वसु स्पार्हं तदा भर ॥ (४)
हे इंद्र! आप के पास जो अचंचल और स्थिर धन है, ऐसा ही पुरुषार्थ वाला धन हमें प्रदान कीजिए. (४)
O Indra! Give us the same effort and steady wealth that you have. (4)