सामवेद (अध्याय 2)
इहेव शृण्व एषां कशा हस्तेषु यद्वदान् । नि यामं चित्रमृञ्जते ॥ (१)
मरुद्गणों के हाथों में चाबुक है. उन चाबुकों से जो आवाज होती है, वह हमें सुनाई देती है. ये आवाजें (ध्वनियां) युद्ध में अनेक प्रकार की वीरता प्रदर्शित करती हैं. (१)
The deserters have a whip in their hands. We hear the sound from those whips. These voices (sounds) display many types of bravery in war. (1)