सामवेद (अध्याय 2)
यँ रक्षन्ति प्रचेतसो वरुणो मित्रो अर्यमा । न किः स दभ्यते जनः ॥ (१)
जिस यजमान की रक्षा श्रेष्ठ ज्ञान वाले वरुण, मित्र तथा अर्यमा देवता करते हैं, उस यजमान का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता. (१)
No one can dandy the host who is protected by Varuna, Mitra and Aryama Devta with superior knowledge. (1)