हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 20.1.12

अध्याय 20 → खंड 1 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 20)

सामवेद: | खंड: 1
अहमिद्धि पितुष्परि मेधामृतस्य जग्रह । अहँ सूर्य इवाजनि ॥ (१२)
हे इंद्र! हम जब पिता जैसे आप की श्रेष्ठ बुद्धि पाते हैं, तो हमें ऐसा लगता है मानो हम सूर्य जैसे हो गए हों. (१२)
O Indra! When we find the superior wisdom of you like the Father, we feel as if we have become like the sun. (12)