हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 20.1.14

अध्याय 20 → खंड 1 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 20)

सामवेद: | खंड: 1
ये त्वामिन्द्र न तुष्टुवुरृषयो ये च तुष्टुवुः । ममेद्वर्धस्व सुष्टुतः ॥ (१४)
हे इंद्र! आप को प्रसन्न करने वाले और संतुष्ट ऋषियों में हमारी प्रार्थनाओं की प्रशंसा होती है. उन के प्रभाव से आप संतुष्ट होइए, बढ़ोतरी पाइए. (१४)
O Indra! Our prayers are admired among the sages who please and satisfy you. Be satisfied with their effect, get an increase. (14)