हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 20.2.10

अध्याय 20 → खंड 2 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 20)

सामवेद: | खंड: 2
नदं व ओदतीनां नदं योयुवतीनाम् । पतिं वो अघ्न्यानां धेनूनामिषुध्यसि ॥ (१०)
हे यजमानो! इंद्र युवती उषा को उपजाने वाले हैं, चंद्र किरणों को उत्पन्न करने वाले और गोपालक हैं. वे गाय के दूध को पोषक अन्न के रूप में प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं. इंद्र सब कुछ करने में समर्थ हैं. (१०)
O hosts! Indra is the one who produces the young woman Usha, the creator of the lunar rays and the gopalak. They wish to get cow's milk as nutritious food. Indra is capable of doing everything. (10)