सामवेद (अध्याय 21)
भद्रो नो अग्निराहुतो भद्रा रातिः सुभग भद्रो अध्वरः । भद्रा उत प्रशस्तयः ॥ (४)
हे अग्नि! हम आप को आहुति देते हैं. आप हमारा कल्याण कीजिए. आप सौभाग्यशाली हैं. आप की कृपा हमें प्राप्त हो. हम कल्याणकारी स्तुतियां गा रहे हैं. आप हमारा कल्याण कीजिए. (४)
O agni! We sacrifice you. You do us welfare. You are lucky. We receive your grace. We are singing welfare praises. You do us welfare. (4)