हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 21.3.8

अध्याय 21 → खंड 3 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 21)

सामवेद: | खंड: 3
क्षपो राजन्नुत त्मनाग्ने वस्तोरुतोषसः । स तिग्मजम्भ रक्षसो दह प्रति ॥ (८)
हे अग्नि! आप प्रकाशमान हैं. आप दिनरात (हर समय) दुष्टों को पीड़ा पहुंचाइए. आप तेजस्वी हैं. आप राक्षसों को जला कर भस्म कर दीजिए. (८)
O agni! You are shining. You torment the wicked day and night (all the time). You are stunning. You burn the demons and consume them. (8)