सामवेद (अध्याय 21)
पन्याँसं जातवेदसं यो देवतात्युद्यता । हव्यान्यैरयद्दिवि ॥ (३)
हे अग्नि! आप सारे ज्ञानों से परिपूर्ण हैं. आप हवि को स्वर्गलोक में पहुंचाते हैं. हम आप की स्तुति करते हैं. (३)
O agni! You are full of all knowledge. You bring Havi to heaven. We praise you. (3)