सामवेद (अध्याय 21)
पदं देवस्य मीढुषोऽनाधृष्टाभिरूतिभिः । भद्रा सूर्य इवोपदृक् ॥ (९)
हे अग्नि! आप प्रकाशवान, सराहनीय, शत्रुहीन और धैर्यशाली हैं. आप का दर्शन करना सूर्य के दर्शन के समान कल्याणकारी है. (९)
O agni! You are light, admirable, enemyless and patient. Seeing you is as beneficial as seeing the sun. (9)