सामवेद (अध्याय 23)
वायो शुक्रो अयामि ते मध्वो अग्रं दिविष्टिषु । आ याहि सोमपीतये स्पार्हो देव नियुत्वता ॥ (१)
हे वायु! हम यज्ञ में सब से पहले आप को सोमरस चढ़ाते हैं. आप आदरणीय हैं. हे देव! आप नियुत नामक घोड़े के साथ सोमपान के लिए आ जाइए. (१)
O wind! We offer someras to you first in the yajna. You are respected. O God! You come to Sompan with a horse called Nyut. (1)