हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 23.2.4

अध्याय 23 → खंड 2 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 23)

सामवेद: | खंड: 2
अध क्षपा परिष्कृतो वाजाँ अभि प्र गाहते । यदी विवस्वतो धियो हरिँ हिन्वन्ति यातवे ॥ (४)
हे सोम! आप पौष्टिक अन्न देते हैं. आधी रात के बीत जाने पर छने हुए सोम में जल मिलाया जाता है. यजमान की बुद्धि हरित सोमरस को कलश की ओर उन्मुख करती है. (४)
O Mon! You give nutritious food. At the end of midnight, water is added to the filtered som. The wisdom of the host orients the green somerasa towards the urn. (4)