सामवेद (अध्याय 23)
यज्ञ इन्द्रमवर्धयद्यद्भूमिं व्यवर्तयत् । चक्राण ओपशं दिवि ॥ (१)
यज्ञ इंद्र की बढ़ोतरी व भूमि को विस्तृत करते हैं. वे स्वर्गलोक से मेघों को वर्षा के लिए प्रेरित करते हैं. (१)
Yajna expands indra's growth and land. They inspire clouds from heaven to rain. (1)