सामवेद (अध्याय 23)
तव त्यदिन्द्रियं बृहत्तव दक्ष्ममुत क्रतुम् । वज्रँ शिशाति धिषणा वरेण्यम् ॥ (७)
हे इंद्र! आप अपनी विशालता, दक्षता और श्रेष्ठ बुद्धि से यज्ञ और वज्र को तीक्ष्ण बनाते हैं.(७)
O Indra! You sharpen the yajna and vajra with your vastness, efficiency and superior intelligence. (7)