सामवेद (अध्याय 23)
नमस्ते अग्न ओजसे गृणन्ति देव कृष्टयः । अमैरमित्रमर्दय ॥ (१)
हे अग्नि! हम बल प्राप्ति के लिए आप को आमंत्रित करते हैं. आप अमित्रों का मर्दन करने की कृपा कीजिए. (१)
O agni! We invite you to gain force. Please insult the unfriendly. (1)