सामवेद (अध्याय 23)
ओजस्तदस्य तित्विष उभे यत्समवर्त्तयत् । इन्द्रश्चर्मेव रोदसी ॥ (६)
इंद्र ने अपने ओज से स्वर्गलोक और भूलोक को चमड़ी की तरह धारण कर रखा है. (६)
Indra has kept heaven and earth like skin with his oz. (6)
अध्याय 23 → खंड 4 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation