हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 23.4.9

अध्याय 23 → खंड 4 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 23)

सामवेद: | खंड: 4
नीव शीर्षाणि मृढ्वं मध्य आपस्य तिष्ठति । श‍ृङ्गेभिर्दशभिर्दिशन् ॥ (९)
हे यजमानो! अभीष्ट फलदायी इंद्र हमारे यज्ञ के मध्य उपस्थित हैं. हम शीश नमन कर उन दर्शनीय इंद्र का दर्शन करें. (९)
O hosts! The desired fruitful Indra is present in the middle of our yajna. Let us bow down and see those visible Indra. (9)