हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 24.2.3

अध्याय 24 → खंड 2 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 24)

सामवेद: | खंड: 2
विष्णोः कर्माणि पश्यत यतो व्रतानि पस्पशे । इन्द्रस्य युज्यः सखा ॥ (३)
हे यजमानो! आप विष्णु के कमो को देखने की कृपा कीजिए. उन कर्मों के वे प्रेरक और इंद्र के योग्य मित्र हैं. (३)
O hosts! Please see the kamo of Vishnu. He is the motivator of those deeds and a worthy friend of Indra. (3)