सामवेद (अध्याय 24)
इन्द्राग्नी अपसस्परि उप प्र यन्ति धीतयः । ऋतस्य पथ्या अनु ॥ (११)
हे इंद्र! हे अग्नि! होता ऋत् (सत्य) के पथ का अनुगमन कर के सिद्धि की ओर समीप जाते हैं. (११)
O Indra! O agni! They follow the path of hota rit (truth) and go closer to perfection. (11)