हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 24.4.8

अध्याय 24 → खंड 4 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 24)

सामवेद: | खंड: 4
उप च्छायामिव घृणेरगन्म शर्म ते वयम् । अग्ने हिरण्यसन्दृशः ॥ (८)
हे अग्नि! आप सोने की तरह चमकीले हैं. हम आप से उसी प्रकार सुख पाते हैं, जिस प्रकार लोग गरमी में छाया से पाते हैं. (८)
O agni! You are as bright as gold. We get happiness from you in the same way as people get from the shade in summer. (8)