सामवेद (अध्याय 25)
प्रति प्रियतमँ रथं वृशणं वसुवाहनम् । स्तोता वामश्विनावृषि स्तोमेभिर्भूषति प्रति माध्वी मम श्रुतँ हवम् ॥ (७)
हे अश्चिनीकुमारो! आप का रथ वैभव व पराक्रम धारण करता है. आप का रथ उपासकों की प्रार्थना से सुशोभित होता है. आप हमारी प्रार्थनाओं को सुनने की कृपा कीजिए. (७)
O Ashchini Kumaro! Your chariot holds splendour and might. Your chariot is adorned with the prayers of the worshippers. Please listen to our prayers. (7)