हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 25.3.9

अध्याय 25 → खंड 3 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 25)

सामवेद: | खंड: 3
आ नो रत्नानि बिभ्रतावश्विना गच्छतं युवम् । रुद्रा हिरण्यवर्त्तनी जुषाणा वाजिनीवसू माध्वी मम श्रुतँ हवम् ॥ (९)
हे अश्विनीकुमारो! आप सोने के रथ वाले, शत्रुनाशी, धनधारी, धनधान्य वाले व यज्ञ प्रेमी हैं. आप हमारे यज्ञ में पधारिए और प्रतिष्ठित होइए. आप हमारी प्रार्थनाओं को सुनने की कृपा कीजिए. (९)
O Ashwinikumaro! You are a gold chariot, enemy, wealthy, wealthy and a yagna lover. You come to our yajna and be distinguished. Please listen to our prayers. (9)