हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 26.2.10

अध्याय 26 → खंड 2 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 26)

सामवेद: | खंड: 2
बट् सूर्य श्रवसा महाँ असि सत्रा देव महाँ असि । मह्ना देवानामसुर्यः पुरोहितो विभु ज्योतिरदाभ्यम् ॥ (१०)
हे सूर्य! आप का यश महान है. देवों में आप विशेष महान हैं. आप तम नाशक, देवताओं के नेता हैं. आप की ज्योति अमर व सर्वव्यापक है. (१०)
O sun! Your fame is great. You are especially great in the gods. You are the leader of the tam destroyer, the gods. Your light is immortal and omnipresent. (10)