हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 26.2.5

अध्याय 26 → खंड 2 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 26)

सामवेद: | खंड: 2
ऐभिर्ददे वृष्ण्या पौँस्यानि येभिरौक्षद्वृत्रहत्याय वज्री । ये कर्मणः क्रियमाणस्य मह्न ऋतेकर्ममुदजायन्त देवाः ॥ (५)
हे इंद्र! आप मरुद्गणों के सहयोग से पुरुषार्थपूर्ण काम करते हैं. आप वज्रधारी व वृत्रनाशक हैं. आप शत्रुनाश हेतु जलवृष्टि करते हैं. महान कार्य करने वाले अन्य देवता भी उन का सहयोग करते हैं. (५)
O Indra! You do effortful work with the help of the deserts. You are vajradhari and vrikshmik. You rain water to destroy the enemy. Other gods who do great work also cooperate with them. (5)