सामवेद (अध्याय 26)
पिबन्ति मित्रो अर्यमा तना पूतस्य वरुणः । त्रिषधस्थस्य जावतः ॥ (७)
हे सोम! परिष्कृत किया हुआ सोमरस तीन बरतनों में रखा हुआ है. मित्र, अर्यमा और वरुण उस को पीने की कृपा करें. (७)
O Mon! The refined somers is kept in three vessels. Friends, Aryama and Varuna please drink it. (7)