हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 26.3.2

अध्याय 26 → खंड 3 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 26)

सामवेद: | खंड: 3
द्विता यो वृत्रहन्तमो विद इन्द्रः शतक्रतुः । उप नो हरिभिः सुतम् ॥ (२)
हे इंद्र! आप सैकड़ों कर्म करने वाले हैं. आप वृत्रहंता हैं. आप अपने घोड़ों से इस यज्ञ में अवश्य ही पधारने की कृपा करें. (२)
O Indra! You are going to do hundreds of deeds. You are a great man. Please please come to this yagna with your horses. (2)