हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 26.6.1

अध्याय 26 → खंड 6 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 26)

सामवेद: | खंड: 6
प्र सो अग्ने तवोतिभिः सुविराभिस्तरति वाजकर्मभिः । यस्य त्वँ सख्यमाविथ ॥ (१)
हे अग्नि! जो आप को मैत्री भाव से पा लेता है, वह यजमान श्रेष्ठ वीर और श्रेष्ठ कर्मवान हो जाता है. आप की रक्षा (आशीर्वाद) से उस का बेड़ा पार हो जाता है. (१)
O agni! The one who finds you with friendship becomes the best heroic and the best karmavan. By protecting you (blessings), his fleet crosses. (1)