हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 26.7.15

अध्याय 26 → खंड 7 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 26)

सामवेद: | खंड: 7
द्रप्सः समुद्रमभि यज्जिगाति पश्यन्गृध्रस्य चक्षसा विधर्मन् । भानुः शुक्रेण शोचिषा चकानस्तृतीये चक्रे रजसि प्रियाणि ॥ (१५)
हे वेन! जब आप समुद्र के जल को ले कर गिद्ध जैसी दृष्टि से देखते हुए मेघों के पास पहुंचते हैं तब सूर्य की तरह चमकते हुए तीसरे लोक से प्राण जल बरसाते हैं. (१५)
Hey Wayne! When you take the water of the sea and look at it like a vulture and reach the clouds, then shining like the sun, you rain water from the third world. (15)