हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 27.1.21

अध्याय 27 → खंड 1 → मंत्र 21 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 27)

सामवेद: | खंड: 1
इन्द्रस्य बाहू स्थविरौ युवानावनाधृष्यौ सुप्रतीकावसह्यौ । तौ युञ्जीत प्रथमौ योग आगते याभ्यां जितमसुराणाँ सहो महत् ॥ (२१)
इंद्र के बाहु हाथी की सूंड़ की तरह हैं. आप सर्वप्रथम उन भुजाओं को युद्ध में प्रेरित करने की कृपा कीजिए. आप बलजित्‌, स्थिर व जवान हैं. आप पर किसी का वश नहीं चल सकता. (२१)
Indra's arms are like elephant trunks. Please first inspire those arms into battle. You are strong, stable and young. No one can control you. (21)