सामवेद (अध्याय 27)
गोत्रभिदं गोविदं वज्रबाहुं जयन्तमज्म प्रमृणन्तमोजसा । इमँ सजाता अनु वीरयध्वमिन्द्रँ सखायो अनु सँ रभध्वम् ॥ (६)
हे इंद्र! आप दुश्मनों के गढ़ भेद देते हैं. आप वज्रबाहु, शत्रुनाशक, विजेता, गोपालक, नेता और पराक्रमशील हैं. शत्रु पर क्रोध करने में आप इंद्र का अनुगमन कीजिए. (६)
O Indra! You penetrate the strongholds of enemies. You are vajrabahu, enemy destroyer, conqueror, gopalak, leader and mighty. Follow Indra in angering the enemy. (6)