हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 3.2.10

अध्याय 3 → खंड 2 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 3)

सामवेद: | खंड: 2
यथा गौरो अपा कृतं तृष्यन्नेत्यवेरिणम् । आपित्वे नः प्रपित्वे तूयमा गहि कण्वेषु सु सचा पिब ॥ (१०)
हे इंद्र! जैसे प्यासे गौर हिरण पानी से भरे हुए तालाब के पास जाते हैं, उसी प्रकार आप हमारी प्रार्थनाओं से भरेपूरे यज्ञ में पधारिए. कण्व के यज्ञ में जल्दी से जल्दी आइए. सोमरस पी कर प्रसन्न होइए. (१०)
O Indra! Just as thirsty gaur deer go to a pond full of water, so you come to the entire yagna filled with our prayers. Come to the yagna of Kanva as soon as possible. Be happy to drink someras. (10)