हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 3.4.10

अध्याय 3 → खंड 4 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 3)

सामवेद: | खंड: 4
वयमेनमिदा ह्योपीपेमेह वज्रिणम् । तस्मा उ अद्य सवने सुतं भरा नूनं भूषत श्रुते ॥ (१०)
हे इंद्र! हम ने कल भी आप को सोमरस भेंट किया था. हम आज भी यज्ञ में आप को सोमरस भेंट करते हैं. हे यजमानो! आप स्तोत्र गा कर इंद्र की शोभा बढ़ाइए. (१०)
O Indra! We presented you somers yesterday too. We still present somersas to you in the yagna. O hosts! You sing the hymn and adorn Indra. (10)