हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 3.5.7

अध्याय 3 → खंड 5 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 3)

सामवेद: | खंड: 5
यदिन्द्र प्रागपागुदग्न्यग्वा हूयसे नृभिः । सिमा पुरू नृषूतो अस्यानवेऽसि प्रशर्ध तुर्वशे ॥ (७)
हे इंद्र! पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण सभी दिशाओं से मनुष्य आप को सहायता के लिए बुलाते हैं. आप शत्रुओं का नाश करने वाले हैं. अनु और तुर्वश के लिए स्तुतियों से आप को बुलाया जाता है. (७)
O Indra! Humans from all directions east, west, north and south call you for help. You are going to destroy enemies. You are called by praises for Anu and Turvash. (7)