सामवेद (अध्याय 3)
इन्द्राग्नी अपादियं पूर्वागात्पद्वतीभ्यः । हित्वा शिरो जिह्वया रारपच्चरत्त्रिँशत्पदा न्यक्रमीत् ॥ (९)
हे इंद्र! हे अग्नि! बिना पैरों वाली उषा पैरों वाली जनता से पहले आ जाती हैं. सिर न होने पर भी जीभ से सब को प्रेरणा देती हुई एक दिन में तीस मुहूर्तो को पार कर जाती हैं. (९)
O Indra! O agni! Usha with no feet comes before the people with feet. Even if there is no head, inspiring everyone with the tongue, she crosses thirty muhurats in a day. (9)