हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 3.6.9

अध्याय 3 → खंड 6 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 3)

सामवेद: | खंड: 6
महे च न त्वाद्रिवः परा शुल्काय दीयसे । न सहस्राय नायुताये वज्रिवो न शताय शतामघ ॥ (९)
हे इंद्र! आप वज्र धारण करने वाले हैं. बहुत से धन के बदले भी मैं आप को नहीं छोड़ सकता हूं. हजार के बदले भी आप को नहीं बेचा जा सकता. अपार धन के बदले भी आप को नहीं बेचा जा सकता. (९)
O Indra! You are going to wear thunderbolts. Even in exchange for a lot of money, I can't leave you. You can't be sold even for a thousand. You cannot be sold even in exchange for immense money. (9)