हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 3.7.10

अध्याय 3 → खंड 7 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 3)

सामवेद: | खंड: 7
त्वामिदा ह्यो नरोऽपीप्यन्वज्रिन्भूर्णयः । स इन्द्र स्तोमवाहस इह श्रुध्युप स्वसरमा गहि ॥ (१०)
हे इंद्र! आप वज्र धारण करने वाले हैं. यज्ञ करने वाले यजमानों ने आप को आज भी और पहले भी सोमरस भेंट किया है. आप यज्ञ मंडप में पधारिए. स्तोत्र पढ़ने वाले यजमानों के स्तोत्र सुनिए. (१०)
O Indra! You are going to wear thunderbolts. The hosts who performed the yajna have presented you with Someras even today and before. You come to the Yagya Mandap. Listen to the psalms of the hosts who read the psalms. (10)