हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 3.7.7

अध्याय 3 → खंड 7 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 3)

सामवेद: | खंड: 7
त्वष्टा नो दैव्यं वचः पर्जन्यो ब्रह्मणस्पतिः । पुत्रैर्भ्रातृभिरदितिर्नु पातु नो दुष्टरं त्रामणं वचः ॥ (७)
त्वष्टा देवताओं के शिल्पी (कारीगर) हैं. पर्जन्य देव बरसात के स्वामी हैं. ब्रह्मणस्पति देवता अपने बेटों और भाइयों के साथ हमारी रक्षा करें. देवताओं की माता अदिति हमारी रक्षा करें. अदिति दुःख दूर करने वाली और रक्षा करने वाली हमारी स्तुतियों से हम पर कृपा करें. (७)
Tvashta is the shilpi (artisan) of the gods. Parjanya Dev is the swami of rain. May the Brahmanaspati deity protect us along with his sons and brothers. May Aditi, the mother of gods, protect us. Aditi, may be kind to us with our praises that remove sorrow and protect us. (7)