हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 3.8.2

अध्याय 3 → खंड 8 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 3)

सामवेद: | खंड: 8
इमा उ वां दिविष्टय उस्रा हवन्ते अश्विना । अयं वामह्वेऽवसे शचीवसू विशंविशँ हि गच्छथः ॥ (२)
हे अश्विनीकुमारो! प्रकाश चाहने वाले यजमान आप को बुलाते हैं. मैं भी कर्म को धन मानने वाले आप को बुलाता हूं. हम अपनी रक्षा के लिए आप दोनों को बुलाते हैं. हम आप दोनों को तृप्त (प्रसन्न) करने के लिए बुलाते हैं. आप स्तुति करने वाले हर एक यजमान के पास पधारते हो. (२)
O Ashwinikumaro! The hosts who want light call you. I also call you who consider karma as wealth. We call both of you to protect us. We call you both to satisfy (please). You come to every host who praises you. (2)