सामवेद (अध्याय 4)
प्र वो महे मतयो यन्तु विष्णवे मरुत्वते गिरिजा एवयामरुत् । प्र शर्धाय प्र यज्यवे सुखादये तवसे भन्ददिष्टये धुनिव्रताय शवसे ॥ (६)
हे इंद्र! आप महान हैं. एवयामरुत् (ऋषि) आप की उपासना करते हैं. एवयामरुत् ऋषि की स्तुतियां मरुदगणों तक पहुंचें. एवयामरुत् ऋषि की स्तुतियां विष्णु तक पहुंचें. यजमानों का कल्याण हो. यजमानों को सुखादि प्राप्त हो. यजमानों को मरुदगणों का बल प्राप्त हो. (६)
O Indra! You are great. Avyamrut (sage) worships you. The praises of Avyamrut Rishi reach the Marudganas. The praises of Avyamrut Rishi reach Vishnu. Welfare of hosts. May the hosts get happiness. May the hosts get the strength of the marudganas. (6)