सामवेद (अध्याय 4)
प्रप्र वस्त्रिष्टुभमिषं वन्दद्वीरायेन्दवे । धिया वो मेधसातये पुरन्ध्या विवासति ॥ (१)
हे यजमानो! आप वीर इंद्र को हवि प्रदान करो. वे यज्ञ को पूरा करने में बुद्धि से किए गए श्रेष्ठ कार्यो की प्रशंसा व मनोकामनाएं पूरी करते हैं. वे यजमानों का सम्मान करते हैं. (१)
O hosts! You give the heroic Indra a boost. They praise and fulfill the wishes of the best work done with intelligence in completing the yajna. They respect the hosts. (1)
सामवेद (अध्याय 4)
कश्यपस्य स्वर्विदो यावाहुः सयुजाविति । ययोर्विश्वमपि व्रतं यज्ञं धीरा निचाय्य ॥ (२)
इंद्र के घोड़े अपनेआप को जानने वाले व सर्वज्ञ हैं. ये घोड़े इंद्र को यज्ञ में ले जाने में लगे रहते हैं. विद्वान् कहते हैं कि यज्ञ में जाने का निश्चय होते ही ये घोड़े अपनेआप रथ में जुत जाते हैं. (२)
Indra's horses are self-knowing and omniscient. These horses are engaged in taking Indra to the yagna. Scholars say that as soon as they are determined to go to the yagna, these horses automatically get stuck in the chariot. (2)
सामवेद (अध्याय 4)
अर्चत प्रार्चता नरः प्रियमेधासो अर्चत । अर्चन्तु पुत्रका उत पुरमिद्धृष्ण्वर्चत ॥ (३)
हे यजमानो! इंद्र आप को अपनी कृपा से ऐसी संतान प्रदान करते हैं, जो यज्ञ में रुचि रखती हों. वे यजमानों की आकांक्षा पूरी करते हैं. वे शत्रुजित् हैं. आप सभी इंद्र की अर्चना कीजिए. (३)
O hosts! Indra, by his grace, gives you such children, who are interested in yajna. They fulfill the aspirations of the hosts. They are enemies. All of you worship Indra. (3)
सामवेद (अध्याय 4)
उक्थमिन्द्राय शँस्यं वर्धनं पुरुनिःषिधे । शक्रो यथा सुतेषु नो रारणत्सख्येषु च ॥ (४)
हे यजमानो! आप क्षमतावान इंद्र के लिए प्रार्थना गाइए. आप उन शत्रुनाशक के लिए रेष्ठ प्रार्थना गाइए. ऐसा करने से हम पर, हमारी संतान पर और हमारे मित्रों पर उन की कृपा होगी. (४)
O hosts! You sing prayers for the mighty Indra. You sing a prayer for those destroyers. By doing this, they will be kind to us, our children and our friends. (4)
सामवेद (अध्याय 4)
विश्वानरस्य वस्पतिमनानतस्य शवसः । एवैश्च चर्षणीनामूती हुवे रथानाम् ॥ (५)
हे मरुदगणो! आप के सैनिकों पर आक्रमण होता है तो इंद्र रक्षा करते हैं. वे शत्रुओं के सैनिकों पर आक्रमण करने वाले हैं. उन को कोई नहीं जीत सकता. हम रथों की रक्षा हेतु उन शक्तिमान को आमंत्रित करते हैं. (५)
O Marudagano! If your soldiers are attacked, Indra protects. They are going to attack the soldiers of the enemies. No one can win them. We invite those Shaktimaans to protect the chariots. (5)
सामवेद (अध्याय 4)
स घा यस्ते दिवो नरो धिया मर्तस्य शमतः । ऊती स बृहतो दिवो द्विषो अँहो न तरति ॥ (६)
हे इंद्र! वह व्यक्ति आप के दिव्य संरक्षण में रहता है. वह व्यक्ति पाप एवं दुश्मनों से रक्षित रहता है, जो व्यक्ति यजमान की प्रभावी प्रार्थनाओं से आप का सखा बन जाता है. (६)
O Indra! That person lives under the divine protection of you. That person is protected from sin and enemies, the person who becomes your friend with the effective prayers of the host. (6)
सामवेद (अध्याय 4)
विभोष्ट इन्द्र राधसो विभ्वी रातिः शतक्रतो । अथा नो विश्वचर्षणे द्युम्नँ सुदत्र मँहय ॥ (७)
हे इंद्र! आप धनवान, सर्वज्ञाता, सैकड़ों यज्ञ करने वाले, विलक्षण महिमाशाली हैं. आप हमें धन दीजिए और संपन्न बनाइए. (७)
O Indra! You are rich, omniscient, performing hundreds of sacrifices, extraordinarily glorious. You give us money and make it prosperous. (7)
सामवेद (अध्याय 4)
वयश्चित्ते पतत्रिणो द्विपाच्चतुष्पादर्जुनि । उषः प्रारन्नृतूँरनु दिवो अन्तेभ्यस्परि ॥ (८)
हे उषा! आप प्रकाशवाली हैं. आप जब उदय हो जाती हैं तो अंतरिक्ष में पक्षी दूरदूर तक उड़ते हैं. पशु भी विचरण करते हैं. मनुष्य भी गतिशील हो जाते हैं. (८)
O Usha! You are light. When you rise, birds fly far and wide in space. Animals also roam. Humans also become dynamic. (8)