हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 4.3.8

अध्याय 4 → खंड 3 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 4)

सामवेद: | खंड: 3
त्यँ सु मेषं महया स्वर्विदँ शतं यस्य सुभुवः साकमीरते । अत्यं न वाजँ हवनस्यदँ रथमेन्द्रं ववृत्यामवसे सुवृक्तिभिः ॥ (८)
हे यजमानो! इंद्र आत्मज्ञाता व महिमाशाली हैं. वे सौसौ कार्य एक साथ करने वाले व शत्रुओं से होड़ करने वाले हैं. यजमानों को धनदान करने के लिए वे हवन में पधारते हैं. घोड़े की तरह तेजी से पहुंचते हैं. आप अपने संरक्षण के लिए सौसौ प्रार्थनाओं से उन की उपासना कीजिए. (८)
O hosts! Indra is self-conscious and glorious. They are going to do hundreds of things together and compete with enemies. They come to havan to donate money to the hosts. Reach as fast as a horse. Worship them with hundreds of prayers for your protection. (8)