हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 4.7.1

अध्याय 4 → खंड 7 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 4)

सामवेद: | खंड: 7
स्वादोरित्था विषूवतो मधोः पिबन्ति गौर्यः । या इन्द्रेण सयावरीर्वृष्णा मदन्ति शोभथा वस्वीरनु स्वराज्यम् ॥ (१)
हे इंद्र! सूर्य रूप में आप की किरणें आप के साथ शोभित होती हैं. वे किरणें स्वादिष्ट मीठे सोमरस को पीती हैं. वे किरणें स्वराज्य में शोभित होती हैं. (१)
O Indra! In the form of the sun, your rays adorn with you. Those rays drink delicious sweet somers. Those rays adorn in Swarajya. (1)