हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 4.9.3

अध्याय 4 → खंड 9 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 4)

सामवेद: | खंड: 9
पवस्व सोम महान्त्समुद्रः पिता देवानां विश्वाभि धाम ॥ (३)
हे सोम! आप फैले हुए हैं. आप महान व समुद्र जैसे हैं. आप पिता (पालक) हैं. आप सभी देवताओं के धाम हैं. (३)
O Mon! You are spread out. You are great and like the sea. You are the father (foster). You are the abode of all gods. (3)